Palitana 5 Chaityavandan In Hindi |work| Full
शत्रुंजय महातीर्थ पालिताना जैन धर्म के सबसे पवित्र और सर्वोच्च तीर्थों में से एक है। इस पावन भूमि के कण-कण में अनंत सिद्ध आत्माओं का वास है। पालिताना की यात्रा के दौरान भावपूर्वक 'पंच चैत्यवंदन' (5 Chaityavandan) करने का विशेष महत्व है। चैत्यवंदन प्रभु की भक्ति, स्तुति और आत्म-शुद्धि का एक सशक्त माध्यम है।
यात्रा करते समय मौन रहना या केवल धार्मिक भजन गाना उत्तम है।
सूरजकुंड सोहामणो, कावड़यक्ष अभिराम;नाभीराया कुल मण्डणो, जिनवर करूं प्रणाम। 3
शीतल छाया रायण तणी, परम शांतिनो वास;जिहां बेसी प्रभु ध्यान धरे, प्रकटे दिव्य प्रकाश।प्रथम जिनेश्वर ऋषभदेव, पादपद्म ज्यां स्थाप्या;नवाणु वारना फेरमां, प्रभुये दर्शन आप्या। palitana 5 chaityavandan in hindi full
यहाँ चैत्यवंदन करने के बाद भाव-यात्रा पूर्ण मानी जाती है। Tattva Gyan
5. पंचम चैत्यवंदन: सकल सिद्ध और सर्व जिनालय
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पाठ के बाद , नमत्थुणं (शक्रस्तव), और स्तवन का गान करें।
पालीताना में चैत्यवंदन करते समय कुछ महत्वपूर्ण चरणों का पालन आवश्यक है:
बोलकर 'तस्स उत्तरी' सूत्र कहें और १ लोगस्स (या ४ नवकार मंत्र) का काउस्सग्ग (ध्यान) करें। परम शांतिनो वास
1. जय तलेटी चैत्यवंदन (पहला पड़ाव)
इसके बाद यथाशक्ति 'लोगस्स' का काउस्सग्ग करें, स्तवन गाएं, 'थुई' (स्तुति) बोलें और खमासमण देकर वंदना पूरी करें।
पर्वत की चढ़ाई के दौरान या मुख्य मंदिरों के मार्ग में आने वाले शांतिनाथ भगवान के स्थान पर यह चैत्यवंदन किया जाता है。
यदि आपने अभी तक इस दिव्य तीर्थ की यात्रा नहीं की है, तो अवश्य जाएं और अपने जीवन को पुण्यमय बनाएं।
प्रभु को झुककर वंदन करना।